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Wednesday, 12 April 2023

शहर ए तैयबा का वो बाज़ार बड़ा प्यारा हैं ! Shar e taiba ka wo bazar bada payara gai. شہر طیبہ کا وہ بازار بڑا پیارا ہے

शहर ए तैयबा का वो बाज़ार बड़ा प्यारा हैं ! 
हम गुलामों का ख़रीदार बड़ा प्यारा है !

रोज कहती है मदीने में उतर के जन्नत
या नबी आपका दरबार बड़ा प्यारा है !

शहर ए तैयबा का वो बाज़ार बड़ा प्यारा हैं ! 
हम गुलामों का ख़रीदार बड़ा प्यारा है !

देखकर कहते थे सिद्दीक को मेरे आका
ऐ सहाबा ये मेरा यार बड़ा प्यारा हैं !

शहर ए तैयबा का वो बाज़ार बड़ा प्यारा हैं ! 
हम गुलामों का ख़रीदार बड़ा प्यारा है !

ऐ ग़ज़ाली जो छुपाएगा हमें महशर मे 
वो वसी दामने सरकार बड़ा प्यारा है

शहर ए तैयबा का वो बाज़ार बड़ा प्यारा हैं ! 
हम गुलामों का ख़रीदार बड़ा प्यारा है !

करके दीदार ये कुफ्फार ने आक़ा से कहा 
या नबी आपका किरदार बड़ा प्यारा है !

 शहर ए तैयबा का वो बाज़ार बड़ा प्यारा हैं ! 
हम गुलामों का ख़रीदार बड़ा प्यारा है ! 

कब्र में पूछेंगे जब मुझ से फरिश्ते तो कहूं 
ए फरिश्तो मेरा ग़मख़ार बड़ा प्यारा है 

शहर ए तैयबा का वो बाज़ार बड़ा प्यारा हैं ! 
हम गुलामों का ख़रीदार बड़ा प्यारा है ! 

कर के राज़ि मेरे आक़ा को इलाही ने कहा
सर को सजदे से उठा यार बड़ा प्यारा हैं 

शहर ए तैयबा का वो बाज़ार बड़ा प्यारा हैं ! 
हम गुलामों का ख़रीदार बड़ा प्यारा है !


Shar e taiba ka wo bazar bada pyara hai.
Hum ghulamon ka kharidar bada pyara hai 

Roz kahti hai madine me utar ke jannat
Ya nabi aapka darbar bada pyara hai 

Shar e taiba ka wo bazar bada pyara hai.
Hum ghulamon ka kharidar bada pyara hai 

Dekh kar kahte the siddiq ko mere Aaqa
Ay sahaba ye mera yaar bada pyara hai 

Shar e taiba ka wo bazar bada pyara hai.
Hum ghulamon ka kharidar bada pyara hai 

Ay ghazali jo chupayega hamen mahshar me 
Wo wasi daman e sarkar bada pyara hai 

Shar e taiba ka wo bazar bada pyara hai.
Hum ghulamon ka kharidar bada pyara hai 

Kar je didar ye kuffar ne Aaqa se kaha
Ya nabi aapka kirdar bada pyara hai 

Shar e taiba ka wo bazar bada pyara hai.
Hum ghulamon ka kharidar bada pyara hai 

Kabr me punchenge jab mujhse farishte to kahoon
Ay farishton mera ghamkhar bada pyara hai.

Shar e taiba ka wo bazar bada pyara hai.
Hum ghulamon ka kharidar bada pyara hai 

Kar ke razi mere Aaqa ko ilahi ne kaha
Sar ko sajde se utha yaar bada pyara hai

Shar e taiba ka wo bazar bada pyara hai.
Hum ghulamon ka kharidar bada pyara hai 

Marhaba salle ala - salle ala - salle ala .मरहबा सल्ले अला सल्ले अला सल्ले अला !

मरहबा सल्ले अला सल्ले अला सल्ले अला !
मरहबा सल्ले अला सल्ले अला सल्ले अला !

आप  जब आए तो काबे से  ये आती थी सदा
 मरहबा सल्ले अला सल्ले अला सल्ले अला !

हर तरफ शोर हुआ रब के पयंबर  आए
मैं कहूं सबके शफी आज वो सरवर  आए
सारे आलम के लिए बनके वो रहबर आए
है जो महबूब ए खुदा शाफा ए महशर आए
आपको देखकर ये चांद सितारों ने पढ़ा

मरहबा सल्ले अला सल्ले अला सल्ले अला !
मरहबा सल्ले अला सल्ले अला सल्ले अला !

क़त्ल का करके इरादा वो चले थे घर से
कह रहे थे वो बड़ी शान बड़े तेवर से
जिसम कर देंगे जुदा आज नबी  का सर सेए
जब लडी उनकी नज़र चेहरा ए पैग़म्बर  से
गिरके सरकार  के क़दमो पे उमर ने ये पढा़

मरहबा सल्ले अला सल्ले अला सल्ले अला !
मरहबा सल्ले अला सल्ले अला सल्ले अला !

 बु जहल ने ये कहा काम मेरा सूलझा दे 
शान वालें हैं अगर शान हमें दिखला दें 
ए नबी  मुझपे यही एक करम फरमा दें
मेरी मुठ्ठी मैं है क्या चीज हमें बतला दें 
 झूम कर कलमा शहे दिन का कंकर ने पढ़ा 

मरहबा सल्ले अला सल्ले अला सल्ले अला !
मरहबा सल्ले अला सल्ले अला सल्ले अला !

Tuesday, 11 April 2023

sabse Ala wa awla Hamara Nabi ﷺ

Hazaro ambiya aaye hazaro mursalin aaye
                       Lekin
Sabse aula wa aala hamara nahi ﷺ
Sabse bala wa aala hamara nabi

Jinke talwon se jibrail ankhe malen
Chand suraj ishare pe  jiske chalega
Jisjke age diye kufr ke na jale
Bhuj gai jiske aage sabhi madhalen
Shamma wo le kar aya hamara nabi

Lakho aaye yaha aur lakho gaye
Unche unche shahinsha yaha na rahe
Kitne diye jale jal ke phir bujh gaye
Kya khabar kitne taare khile chup gaye
Per na dube na duba hamara nahi 

Aaina haq numa hai Muhammad ki baat
Hai khuda ki wahi unki har ek baat
Hanth ko jinke allah kahe apna haath
Jinke talwo ka dhowan hai aab e haya
Hai wo jaane masiha hamara nahi 

Mangne walon hamko to yun chahiye
Q kahun ye ata wo ata chahiye
Unko maloom hai humko kya chahiye
Bhar jholi meri mere sarkaar ne
Muskura kar kaha aur kya chahiye

Kaun deta hai dene ko muh chahiye
Dene wala hai sacha hamara nabi
Sabse aula wa aala hamara nabi
Sabse bala wa aala hamara nahi
Do jahan ka shahinsha madine me hai
Jiske dar per sakhawat ka dariya bahe
Aur be sahara kaha kisko koi kahe
                          Kyun
Kyun ki Gham zadon ko raza mujda dije ke hai 
Bekason ka sagara hamara nahiﷺ
Sabse aula wa aala hamara nabi
Sabse bala wa aala hamara nabi

Wednesday, 5 April 2023

उन की महक ने दिल के ग़ुंचे खिला दिये हैं



उन की महक ने दिल के ग़ुंचे खिला दिये हैं
जिस राह चल गए हैं कूचे बसा दिये हैं

जब आ गई हैं जोश-ए-रहमत पे उन की आँखें
जलते बुझा दिये हैं, रोते हँसा दिये हैं

एक दिल हमारा क्या है, आज़ार इस का कितना
तुम ने तो चलते फिरते मुर्दे जिला दिये हैं

उन के निसार कोई कैसे ही रंज में हो
जब याद आ गए हैं, सब ग़म भुला दिये हैं

हम से फ़क़ीर भी अब फेरी को उठते होंगे
अब तो ग़नी के दर पर बिस्तर जमा दिये हैं

असरा में गुज़रे जिस दम बेड़े पे क़ुदसियों के
होने लगी सलामी, परचम झुका दिये हैं

आने दो या डुबो दो अब तो तुम्हारी जानिब
कश्ती तुम्हीं पे छोड़ी लंगर उठा दिये हैं

दूल्हा से इतना कह दो, प्यारे !
सुवारी रोको मुश्किल में हैं बराती, पुर-ख़ार बादिये हैं

अल्लाह क्या जहन्नम अब भी न सर्द होगा
रो रो के मुस्तफ़ा ने दरिया बहा दिये हैं

मेरे करीम से गर क़तरा किसी ने माँगा
दरिया बहा दिये हैं, दुर्र-बे-बहा दिये हैं

मुल्क-ए-सुख़न की शाही तुम को, रज़ा
मुसल्लम जिस सम्त आ गए हो सिक्के बिठा दिये हैं
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ان کی مہک نے دل کے غنچے کھلا دیے ہیں
جس راہ چل دئے ہیں کوچے بسادئیے ہیں


Monday, 3 April 2023

नाम मैंने जब मोहम्मद मुस्तफा का ले लिया

नाम मैंने जब मोहम्मद मुस्तफा का ले लिया
मेरे लब ने मेरे लब का बढ़के बोसा ले जिया

देखो सेहरा में अली ने क्या दिया क्या ले दिया
अस्र दे कर गोद मे काबे का काबा ले दिया

तोड़ने जब बूत चढे़ दोशै नबूवत पर अली
यूं लगा कुरान ने पारे का पारा ले लिया 

चुमते रहते थे जिसको खु़द मुहम्मद मुस्तफा
करबला मे उन लबों ने नाना का बोसा ले लिया 

हश्र में कौसर के आगे होंगें हुसैनो और आसन
बांटने उम्मत को कौसर नाना ने पयाला दे दिया

रौज़े पे उनकी जब झुकी मेरी जबिने बेनियाज़
ना समझ सजदा मुनाफिक कदमो के बोसा ले लिया

हो करम अल्लाह मेरे सदके मे अह-ले-बैत के
इनकी मुहब्बत को जो हमने दिल मे अपने ले लिया 

नाम मैंने जब मोहम्मद मुस्तफा का ले लिया
मेरे लब ने मेरे लब का बढ़के बोसा ले जिया

नातें सरकार की पढ़ता हूं मैं। Naate Sarkar ki padhta hoon Main نعت سرکار کی پڑھتا ہوں میں

               


                       विडियो क्लिप
Naate Sarkar ki padhta Hun Main 
Bus ISI Baat Se Ghar Mein Mere rahamat Hogi 

Ek Tera Naam wasila Hai Meri
 Ranjo Gam mein bhi isi Naam Se Rahat Hoti
 yah suna hai ki bahut ghor Andheri Hoti
 Kabr ka khud na Rakhna ay Dil 
Wahan Sarkar Ke Chehre Ki ziyarat Hoti

Naate Sarkar ki padhta Hun Main 
Bus ISI Baat Se Ghar Mein Mere rahamat Hogi 

Kahin yasin kahin taha Kahin washSham Gaya
 jinki kasmay Mera Rab khata hai 
Kitne Dilkash Mere Mahboob Ki Surat Hoti

Naate Sarkar ki padhta Hun Main 
Bus ISI Baat Se Ghar Mein Mere rahamat Hogi 

Hashr ka din bhi Ajab dekhne wala hoga
 julf  lahra ke vo Jab aayenge
For qayamat pe bhi ek aur qayamat hogi.

Naate Sarkar ki padhta Hun Main 
Bus ISI Baat Se Ghar Mein Mere rahamat Hogi 

Unko Mukhtar Banaya Hai Mere Maula me
 Khud Mein bas wahi Ja sakta hai
 Jisko Hasnain Ke Baba ki ijaajat Hoti

Naate Sarkar ki padhta Hun Main 
Bus ISI Baat Se Ghar Mein Mere rahamat Hogi 

Do Jahan Mein use fir Kaun Panah mein Leta
Hoga ruswa wo Sare Hashr Jise syeda Zahara ke bacchon se adawat Hoti

Naate Sarkar ki padhta Hun Main 
Bus ISI Baat Se Ghar Mein Mere rahamat Hogi 

Unki chaukhat me Pade Hain To Badi Mauj mein hain
Laut Ke aenge Jab use Dar de
 Mere Dil tu hi bata kya Teri Halat Hoti

Naate Sarkar ki padhta Hun Main 
Bus ISI Baat Se Ghar Mein Mere rahamat Hogi
Mera Daman to Gunahon se bhara hai Altaf
Ek Sahara Hai Ki Main Unka hoon 
isi nishat se Sare Hasr shafa-at Rhogi

Naate Sarkar ki padhta Hun Main 
Bus ISI Baat Se Ghar Mein Mere rahamat Hogi 

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नातें सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी

एक तेरा नाम वसीला है मेरा
रंज ओ ग़म में भी इसी नाम से रहमत होगी

यह सुना है कि बहुत गोर अंधेरी होगी
क़ब्र का खौफ ना रखना ए दिल
वहां सरकार के चेहरे की ज़ियारत होगी

नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !

कहीं यासीं कहीं ताहा कहीं वश्शमस-आया
जिसकी क़समे मेरा रब खाता है
कितनी दिलकश मेरे महबूब की सूरत होगी।

नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !

हश्र का दिन भी अजब देखने वाला होगा
ज़ुल्फ लहरा के वो जब आएंगे
फिर क़यामत पे भी खुद एक क़यामत होगी

नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !

उनको मुख्तार बनाया है मेरे मौला ने
ख़ुल्द में बस वोही जा सकता है
जिसको हसनैन के नाना की इजाज़त होगी।

नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !

दो जहां में उसे फिर कौन पनाह में लेगा
होगा रुसवा वोह सरे हश्र जिसे 

सैय्यदा ज़हरा के बच्चों से अदावत होगी।

नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !

उनकी चौखट पे पड़े हैं तो बड़ी मौज में हैं
लौट के आएंगे जब उस दर से
मेरे दिल तू ही बता क्या तेरी हालत होगी।

नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !

मेरा दामन तो गुनाहों से भरा है अल्ताफ़
एक सहारा है के मै उनका हुं
इसी निस्बत से सरे हश्र शफाअ़़त होगी।

नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !

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बे-ख़ुद किए देते हैं अब था ( लिरिक्स )

                           विडियो क्लिप 

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

इतना तो करम करना, ए चश्म-ए-करीमाना !
जब जान लबों पर हो, तुम सामने आ थना

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

क्यूँ आँख मिलाई थी, क्यूँ आग लगाई थी
अब रुख़ को छुपा बैठे कर के मुझे दीवानापन

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

जी चाहता है तोहफ़े में भेजूँ मैं उन्हें आँखें
दर्शन का तो दर्शन हो, नज़राने का नजराना

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

क्या लुत्फ़ हो महशर में ! क़दमों में गिरूँ उन के
सरकार कहें देखो, दीवाना है दीवाना !

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

मैं होश-ओ-हवास अपने इस बात पे खो बैठा
जब तू ने कहा हँस के, आया मेरा दीवानापन

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

पीने को तो पी लूँगा, पर अर्ज़ ज़रा सी है
अजमेर का साक़ी हो, बग़दाद का मय-ख़ाना

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

बेदम ! मेरी क़िस्मत में चक्कर हैं इसी दर के
छूटा है न छूटेगा मुझ से दर-ए-जानाना

चमक तुझ से पाते हैं सब पाने वाले ( लिरिक्स ) chamak tujhse paate hain sab pane wale

                

                  विडियो क्लिप 

चमक तुझ से पाते हैं सब पाने वाले
मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले

बरसता नहीं देख कर अब्रे रह़मत
गदों पर भी बरसा दे बरसाने वाले

मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले

मदीने के ख़ित्त़े ख़ुदा तुझ को रख्खे
ग़रीबों फ़क़ीरों के ठहराने वाले

मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले

मैं मुजरिम हूं आक़ा मुझे साथ ले लो

कि रस्ते में हैं जा बजां थाने वाले

मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले

ह़रम की ज़मीं और क़दम रख के चलना
अरे सर का मौका है ओ जाने वाले

मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले

चल उठ जब्हा फ़रसा हो साक़ी के दर पर
दरे जूद ए मेरे मस्ताने वाले

मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले

तेरा खाएं तेरे ग़ुलामों से उलझें
हैं मुन्किर अ़जब खाने ग़ुर्राने वाले

मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले

तू ज़िन्दा है वल्लाह तू ज़िन्दा है वल्लाह
मेरे चश्मे अ़ालम से छुप जाने वाले

मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले

रहेगा यूं ही उन का चरचा रहेगा

पड़े ख़ाक हो जाएं जल जाने वाले

मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले

ये नजदी मुनाफिक है गंदा है वल्ला

जहन्नम पे नाम उसका कुंदा है धल्ला

जो मुर्दा कहे तुमको मुर्दा है धल्ला

 तु जिन्दा है वल्ला तु जिन्दा है धल्ला

मेरे चश्मे आलम से छुप जाने वाले

मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले

अब आई शफ़ाअ़त की साअ़त अब आई

ज़रा चैन ले मेरे घबराने वाले 

मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले

Naat lyrics

12 रबी उल अव्वल मनाने की दलील

12 रबी उल अव्वल यानी ईद मिलादुन्नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मानने पर कई तरह के एतराज और सवालात किए जाते हैं जिनमें से चंद्र सवालात और उनक...