Monday, 3 April 2023

नाम मैंने जब मोहम्मद मुस्तफा का ले लिया

नाम मैंने जब मोहम्मद मुस्तफा का ले लिया
मेरे लब ने मेरे लब का बढ़के बोसा ले जिया

देखो सेहरा में अली ने क्या दिया क्या ले दिया
अस्र दे कर गोद मे काबे का काबा ले दिया

तोड़ने जब बूत चढे़ दोशै नबूवत पर अली
यूं लगा कुरान ने पारे का पारा ले लिया 

चुमते रहते थे जिसको खु़द मुहम्मद मुस्तफा
करबला मे उन लबों ने नाना का बोसा ले लिया 

हश्र में कौसर के आगे होंगें हुसैनो और आसन
बांटने उम्मत को कौसर नाना ने पयाला दे दिया

रौज़े पे उनकी जब झुकी मेरी जबिने बेनियाज़
ना समझ सजदा मुनाफिक कदमो के बोसा ले लिया

हो करम अल्लाह मेरे सदके मे अह-ले-बैत के
इनकी मुहब्बत को जो हमने दिल मे अपने ले लिया 

नाम मैंने जब मोहम्मद मुस्तफा का ले लिया
मेरे लब ने मेरे लब का बढ़के बोसा ले जिया

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