Monday, 3 April 2023

बे-ख़ुद किए देते हैं अब था ( लिरिक्स )

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बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

इतना तो करम करना, ए चश्म-ए-करीमाना !
जब जान लबों पर हो, तुम सामने आ थना

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

क्यूँ आँख मिलाई थी, क्यूँ आग लगाई थी
अब रुख़ को छुपा बैठे कर के मुझे दीवानापन

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

जी चाहता है तोहफ़े में भेजूँ मैं उन्हें आँखें
दर्शन का तो दर्शन हो, नज़राने का नजराना

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

क्या लुत्फ़ हो महशर में ! क़दमों में गिरूँ उन के
सरकार कहें देखो, दीवाना है दीवाना !

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

मैं होश-ओ-हवास अपने इस बात पे खो बैठा
जब तू ने कहा हँस के, आया मेरा दीवानापन

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

पीने को तो पी लूँगा, पर अर्ज़ ज़रा सी है
अजमेर का साक़ी हो, बग़दाद का मय-ख़ाना

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना
आ दिल में तुझे रख लूँ, ए जल्वा-ए-जानाना !

बेदम ! मेरी क़िस्मत में चक्कर हैं इसी दर के
छूटा है न छूटेगा मुझ से दर-ए-जानाना

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