विडियो क्लिप
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नातें सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी
एक तेरा नाम वसीला है मेरा
रंज ओ ग़म में भी इसी नाम से रहमत होगी
यह सुना है कि बहुत गोर अंधेरी होगी
क़ब्र का खौफ ना रखना ए दिल
वहां सरकार के चेहरे की ज़ियारत होगी
नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !
कहीं यासीं कहीं ताहा कहीं वश्शमस-आया
जिसकी क़समे मेरा रब खाता है
कितनी दिलकश मेरे महबूब की सूरत होगी।
नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !
हश्र का दिन भी अजब देखने वाला होगा
ज़ुल्फ लहरा के वो जब आएंगे
फिर क़यामत पे भी खुद एक क़यामत होगी
नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !
उनको मुख्तार बनाया है मेरे मौला ने
ख़ुल्द में बस वोही जा सकता है
जिसको हसनैन के नाना की इजाज़त होगी।
नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !
दो जहां में उसे फिर कौन पनाह में लेगा
होगा रुसवा वोह सरे हश्र जिसे
सैय्यदा ज़हरा के बच्चों से अदावत होगी।
नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !
उनकी चौखट पे पड़े हैं तो बड़ी मौज में हैं
लौट के आएंगे जब उस दर से
मेरे दिल तू ही बता क्या तेरी हालत होगी।
नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !
मेरा दामन तो गुनाहों से भरा है अल्ताफ़
एक सहारा है के मै उनका हुं
इसी निस्बत से सरे हश्र शफाअ़़त होगी।
नात सरकार की पढ़ता हूं मैं
बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी !
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