Monday, 17 April 2023

सब पे लुटा के अपना फैज़ान जा रहा है

सबको उदास करके रमजान जा रहा है
सब पे लुटा के अपना फैज़ान जा रहा हैं

आया था घर हमारे किस्मत हमारी बनके
भेजा था जो खुदा ने वो मेहमान जा रहा मैं

सब पे लुटा के अपना फैज़ान जा रहा है

किस्मत से मिल गया था रमजान का महीना
दिल रो पड़ा है जब यह रमजान जा रहा हैं

सब पे लुटा के अपना फैज़ान जा रहा है

रमजान आ रहा था मुसलमान हंस पड़े थे
रमजान जा रहा है मुसलमान रो रहे हैं 

सब पे लुटा के अपना फैज़ान जा रहा है 

कितनी खुशी मिली थी रमजान आ गया है
कितना  हि ग़म हुआ है रमजान जा रहा हैं

सब पे लुटा के अपना फैज़ान जा रहा है 

बख़्शिश का ज़रिया बनके रमज़ान आ गया या
बख़्शिश लूटा के सब पे रमज़ान जा रहा हैं

सब पे लुटा के अपना फैज़ान जा रहा है

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