सब पे लुटा के अपना फैज़ान जा रहा हैं
आया था घर हमारे किस्मत हमारी बनके
भेजा था जो खुदा ने वो मेहमान जा रहा मैं
सब पे लुटा के अपना फैज़ान जा रहा है
किस्मत से मिल गया था रमजान का महीना
दिल रो पड़ा है जब यह रमजान जा रहा हैं
सब पे लुटा के अपना फैज़ान जा रहा है
रमजान आ रहा था मुसलमान हंस पड़े थे
रमजान जा रहा है मुसलमान रो रहे हैं
सब पे लुटा के अपना फैज़ान जा रहा है
कितनी खुशी मिली थी रमजान आ गया है
कितना हि ग़म हुआ है रमजान जा रहा हैं
सब पे लुटा के अपना फैज़ान जा रहा है
बख़्शिश का ज़रिया बनके रमज़ान आ गया या
बख़्शिश लूटा के सब पे रमज़ान जा रहा हैं
सब पे लुटा के अपना फैज़ान जा रहा है
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